Ghost story of Patna Bihar railway station in hindi

भूतों की रेलगाड़ी: पटना बिहार रेलवे स्टेशन की रहस्यमय कहानी

पटना बिहार के रेलवे स्टेशन पर जो कुछ होता है, वह बस आँधी और तूफान के बराबर है। रात के समय, जब अंधकार छाती है और सभी यात्री अपने घरों की ओर अग्रसर हो रहे होते हैं, तो वहाँ कुछ ऐसी कहानियाँ चलती हैं जिन्हें सुनकर हर किसी के रोमांच से भरे होते हैं।

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एक बार की बात है, एक युवक नाम अर्जुन राय बिहार के छोटे से गाँव से पटना रेलवे स्टेशन आया। उसने एक नई नौकरी की तलाश में यहाँ का रास्ता अपनाया था। जब उसने स्टेशन के प्लेटफार्म पर कदम रखा, तो उसको अपने आपको एक अजीबोगरीब आवाज सुनाई दी।

"कौन है?" अर्जुन ने अपनी आवाज को उठाया, पर कोई जवाब नहीं मिला। वह एकदम से घबराया, पर फिर सोचा कि शायद वह उसकी ही ध्यान की दिशा में कोई हो।

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रात के अंधेरे में, जब स्टेशन का हाल अब और भी सुस्त हो गया था, अर्जुन ने एक भूतिया रेलगाड़ी की आवाज सुनी। उसने धीरे से उस दिशा में देखा तो उसने देखा कि एक पुरानी रेलगाड़ी कुछ फूट दूर उसकी तरफ आ रही थी।


उस रेलगाड़ी के दरवाजे खुले थे, और अंदर से कोई आवाज आ रही थी। अर्जुन का दिल धड़कने लगा। वह धीरे-धीरे उस रेलगाड़ी की तरफ बढ़ा, लेकिन रेलगाड़ी गायब हो गई।


अर्जुन ने देखा कि उसके पैरों के नीचे कुछ बिल्कुल ठंडा हो रहा है, और उसके साथ कुछ गैस्त्स भी चल रहे हैं। वह धीरे-धीरे अपने पैरों की धरती में तक आ गया और बिल्कुल हीरा-मोती की तरह डर के मारे बोला, "कौन है?"


तभी एक बोली सुनाई दी, "मैं हूँ, तेरी मौत।" अर्जुन ने पीछे मुड़कर देखा, पर कुछ नहीं था। बस रेलगाड़ी का स्थान और साथ ही उसकी दिशा बदल गयी थी।


वहाँ की अनगिनत कहानियों ने उस युवक को एक नई दुनिया में ले जाया था, जहाँ भूतों की रेलगाड़ी उसको नई राह दिखाती थी, और रात की अंधकार में उसका ह

हाथ चूमता था। अर्जुन को लगा जैसे वह किसी अदृश्य शक्ति के आगे हैं, जो उसका आत्मा छू रही है। धीरे-धीरे, उसने महसूस किया कि कुछ पिछले समय से वहाँ रहने वाले लोगों की चीखें सुनाई देती हैं। जैसे कि वे किसी दुखद घटना की गवाह हो रहे हैं, जो कभी स्थितिशीलता के बहाने चिपकी नहीं होती।

अर्जुन ने अपने ध्यान को एक पुरानी चार्टर ट्रेन पर मजबूत किया, जो रेलगाड़ी स्टेशन से थोड़ी दूरी पर खड़ी थी। वह स्थानीय लोगों से बातचीत की, जिन्होंने उसे रेलगाड़ी के राज के बारे में बताया। इस रेलगाड़ी का नाम था "भूतों की रेलगाड़ी"।

अर्जुन को सुन कर वह चौंक गया, पर उसने उन लोगों के बयान का ध्यान नहीं दिया। वह निश्चित था कि वह रेलगाड़ी में चढ़ेगा और इस रहस्यमय अनुभव को समझेगा।

जब रात का समय आया, वह रेलगाड़ी में चढ़ा, और एक अद्भुत यात्रा की शुरुआत हुई। रेलगाड़ी का रास्ता बिलकुल भी स्थितिशील नहीं था। यात्री भयभीत थे, और कुछ ने अपने अपने धर्मिक अनुष्ठान की वंदना की।

अर्जुन ने भी देखा कि रेलगाड़ी के दरवाजे खुले थे, और अंदर कुछ अजीबोगरीब आवाज़ सुनाई दी। धीरे-धीरे, रेलगाड़ी का माहौल उनके दिल को भी घेर लिया। वह एक अद्भुत और रहस्यमय सफर में शामिल हो गया था, जो उसके जीवन की नई एक्सपीरियंस बन गया।

इस अद्भुत रेलगाड़ी की यात्रा ने उसकी दुनिया को बदल दिया, और उसने समझा कि कभी-कभी हमारे अदृश्य और रहस्यमय साथी हमें नई दिशा दिखा सकते हैं, जो हमारे जीवन को और भी रोमांचक बना सकती है।

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